पुलिस के राजनीतिकरण से दो पहिए कि सरकार कटघरे में, लहकते मुंगेर ने चुनाव आयोग को झकझोरा

राजनीति

 

मुंगेर में बदलते समीकरण के बीच डीआईजी मनु महाराज ने मोर्चा संभाल लिया है तथा स्वयं सेना के साथ फ्लैग मार्च कर रहे हैं। इसके बावजूद लगते दिल को ठंडा करने में प्रशासन नाकाम है। राजनीति की ऐसी गहरी पैठ ने पुलिस प्रशासन को जकड़ लिया कि दो पहिए की सरकार पूरी तरह से नाकाम हो गई है। जो राजनीति के लिए कोढ़ है। बताते चलें कि चुनाव के बीच दुर्गा पूजा का आयोजन था। जिसमें विसर्जन के दौरान दिनांक 26 अक्टूबर को गोली से एक व्यवसायिक पुत्र की मौत हुई। जिसका आरोप जनता पुलिस पर लगा रही है और मामला इतना उबला कि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव एवं अन्य ने इस घटना का जिक्र जलियांवाला बाग से कर दिया और जनरल डायर तक का जिक्र कर दिया। साथ ही पूरा मामला पूरे भारत के मीडिया की सुर्खियों में छाया रहा तथा चुनाव होने के कारण काफी चर्चा में है।

जानकारी के अनुसार मुंगेर में डीआईजी मनु महाराज पहले आए और अपना प्रशासन का सिक्का लोगों के बीच जमाया तथा पटना में उत्कृष्ट कार्यों के बाद मुंगेर में भी उत्कृष्ट कार्य करने लगे पुनः बाद में एसपी लिपि सिंह ने लखीसराय से मुंगेर आकर कार्यभार संभाला प्रशासनिक कार्यविधि के बीच इन दोनों में मनमुटाव भी रहा। जिसके कारण मनु महाराज कदम पीछे किया और एसपी की प्रशासनिक कार्य अच्छी रही, लेकिन अवैध शराब बिक्री,जुआ अवैध लॉटरी बंद कराने में एसपी नाकाम रहे। इस बीच कई आरोप भी लगे और राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह की पुत्री एसपी लिपि सिंह होने के कारण राजनीतिक के साथ प्रशासनिक दबाव भी लिपि सिंह का रहा। ऐसे कार्य विधि से नीतीश की सरकार और दो पहिए की सरकार दोनों हमाम के कटघरे में खड़े हो गये । चुनाव ने इस कदर मुंह मोड़ा की मुंगेर में हिंदू वोटरों ने ही चुनाव बहिष्कार किया ।

 

जिसके कारण भाजपा को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। प्रशासनिक राजनीतिक कारण के कारण आज पूरे हिंदुस्तान में मुंगेर की घटना राजनीतिक सुर्खियां है। सरकार को यदि या आयोग को यदि यही कार्य घटना के बाद कर लेना था । जिससे आज का यह घटना नहीं घटती पुलिसिया राजनीति करण होने के कारण सरकार पर जो कलंक लगा है यह अब नहीं मिट सकता है, क्योंकि यह हाल आज पूरे भारत में है और आगजनी की घटना नहीं घटती भाजपा की सरकार कटघरे में हैंं। बताते चलें कि पूरे घटनाक्रम पर सीएम, डिप्टी सीएम और आरसीपी सिंह मौन हैंं। यह चर्चा आम जनों के जुबान पर है।

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