बड़े बड़े मंचों पर संगीत की जलवा बेखेर अनाथों को देते नि:शुल्क संगीत की तालीम – गायक रूपेश चौधरी

मनोरंजन

श्रवण आकाश की रिपोर्ट

खगड़िया : जिले के परबत्ता प्रखण्ड अंतर्गत कन्हैयाचक गाँव निवासी राजेश चौधरी व बीणा देवी के सुपुत्र गायक रुपेश चौधरी देश के विभिन्न राज्यों में दे रहे हैं संगीत की तालीम। जिसके कारण गायक रूपेश चौधरी के चाहने वालों की संख्या में तीव्र गति से बढोत्तरी हो रही है। बाल्यावस्था की उम्र में ही अपनी माता वीणा देवी की प्रेरणा से ही इनकी संगीत का दौर प्रारंभ हुई थी। फिर अपने पहले गुरु श्री राम किंकर सिंह के शरण में जाकर संगीत के सुरों की शिक्षा अर्जित किया। तत्पश्चात हिन्दुस्तान में मशहूर शास्त्रीय संगीत ज्ञातव्य व सैकड़ों गायको के गुरु पंडित श्री रामोतार सिंह के शरण में आकर इन्होंने प्रारंभिक संगीत शिक्षा ज्ञान की प्राप्ति कर कई बड़े बड़े संगीत मंचों पर शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति देकर लाखों संगीत प्रेमियों के दिलों में बस गये। फिर तीसरे गुरु व विश्व विख्यात गायक स्वर्गीय फनिभुषण चौधरी के साथ अपनी संगीत की बेहतर तालीम की शिक्षण व अनुभव प्राप्त किया। फिर थोड़े ही दिनों में गायक राजाराम सिंह की प्रेरणा से संगीत का प्रमाण पत्र हासिल कर गायक व संगीत गुरु राजीव सिंह (बेगुसराय) के शिक्षण के बदौलत वर्तमान समय में डिग्री हासिल कर पिजी की पढ़ाई कर रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्र के साथ ही साथ शहरी क्षेत्रों के दौर में अपने करीबी सहयोगी व बड़े भाई तुल्य गायक धीरजकांत सिंह के संरक्षण सह सहयोग से गायक रूपेश चौधरी ग्रामीण गायक कलाकार के साथ ही साथ राज्यस्तरीय कलाकार बनने का सौभाग्य प्राप्त किया और वर्तमान में देश के कई राज्यों में जाकर संगीत के कई बड़े बड़े मंचों पर अपनी मधुर संगीत की धुन सार बिखेरते नजर आ रहें हैं। साथ ही साथ कड़ी मेहनत व लगन के बदौलत दिल्ली जैसे महानगरों में “The 8th Note Music Academy” की स्थापना कर कई छोटे- छोटे बच्चों को संगीत की तालीम दे रहे हैं। साथ ही साथ आसपास कई अनाथ आश्रमों में जाकर लगातार नि:शुल्क संगीत की शिक्षा देकर अनाथों के दिलों में राज कर रहे हैं। गायक रूपेश चौधरी कहते हैं कि विश्व में मसहूर व सभी अनुभवी गायक हमारे गुरु समान है, भले ही मेरा पूजनीय गुरु राम किंकर सिंह, स्वर्गीय फनिभुषण चौधरी, स्वर्गीय रामोतार सिंह और राजीव सिंह, राजाराम सिंह है लेकिन मैं अपने जीवन काल में सबसे बड़ा गुरु अपने माता पिता को मानता हूँ। अंततः हमसे अच्छे, अनुभवी व अपने आप को संगीत के बादशाह बताने वाले और नहीं बताने वाले सभी हमारे सम्मानीय है। मैं अपने सभी सिनयर गायकों का सदा सम्मान करता था, करता हूँ और करता रहुंगा।

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