Gaya - गया में नक्सली संगठन के हथियारबंद दस्ते के तीन कमांडरों ने किया आत्मसमर्पण

ब्रजेश कुमार 27 0 30 July 2020

प्रकाश कुमार की रिपोर्ट

गया में नक्सली संगठन के हथियारबंद दस्ते के तीन कमांडरों ने किया आत्मसमर्पण


प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के छकरबंधा जोन के थे कमांडर



गया(प्रकाश कुमार)। जेल परिसर स्थित 159 वीं बटालियन सीआरपीएफ मुख्यालय परिसर में बुधवार को आयोजित आत्मसमर्पण समारोह में तीनों नक्सली कमांडरों ने आत्म समर्पण किया। इस मौके पर एडीजी, अभियान सुशील मानसिंह खोपडे, सीआरपीएफ के बिहार सेक्टर के आईजी जीवीएच गिरी प्रसाद, मगध रेंज के आईजी राकेश राठी, सीआरपीएफ डीआईजी संजय कुमार, गया के एसएसपी राजीव मिश्रा, औरंगाबाद एसपी पंकज कुमार, सीआरपीएफ कमांडेंट डा.निशित कुमार,205 कोबरा कमांडेंट दिलीप श्रीवास्तव,153 बटालियन सीआरपीएफ कमांडेंट सौरभ चौधरी, द्वितीय कमान अधिकारी अवधेश कुमार डिप्टी कमांडेंट मोतीलाल, डिप्टी कमांडेंट अंबर घोष, डिप्टी कमांडेंट ओपी यादव सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित थे। झारखंड के सीमावर्ती गया जिला के छकरबन्धा वन क्षेत्र में सक्रिय तीन हार्डकोर नक्सली कमांडरों ने बुधवार को एडीजी, अभियान सुशील मानसिंह खोपडे के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।आत्मसमर्पण करने वाले सभी तीनों नक्सली कमांडर प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के शीर्षस्थ कमांडर एवं केन्द्रीय कमेटी के सदस्य संदीप यादव उर्फ विजय यादव के काफी करीबी हैं। गया के छकरबंधा थाना क्षेत्र अंतर्गत मोहलिया गांव के सूबेदार यादव और मनदीप यादव के अलावा गया जिला के लुटुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत असुराइन गांव का शशि भुइंया उर्फ रवि ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें सुबेदार यादव के खिलाफ नक्सल कांडों से संबंधित 14 मामले विभिन्न थानों में दर्ज है। यही स्थिति शशि भुइंया और मनदीप यादव के साथ हैं। उक्त तीनों नक्सली हथियार बंद दस्ते का कमांडर रहा है। उक्त तीनों नक्सली गया और औरंगाबाद जिले में घटित कई चर्चित नक्सली घटनाओं को अंजाम देने में शामिल थे। इनमें औरंगाबाद जिले में भाजपा विधान पार्षद के घर हत्या और लूट, पुलिस बल पर हमला सहित अन्य नक्सली कांड शामिल हैं। सीआरपीएफ के डीआईजी संजय कुमार की पहल पर सीआरपीएफ और कोबरा के कमांडेंट और उनकी टीम ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से संपर्क साधा। नक्सलियों को जब यह भरोसा हो गया कि मुख्यधारा में लौटने पर परिवार के भरण पोषण के लिए सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ मिलेगा।तब नक्सलियों ने आत्मसमर्पण करने का फैसला लिया। एडीजी सुशील खोपडे ने उक्त बातें आत्म समर्पण समारोह को संबोधित करते हुए कहा।श्री खोपडे ने बताया कि नक्सलियों के शीर्षस्थ नेताओं के परिवार एशो-आराम से रहते हैं। वहीं, उनके बच्चें मिशनरी स्कूलों और अन्य प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में पढ़ते है।इस बात को लेकर जमीन से जुड़े नक्सलियों में अपने शीर्षस्थ नेताओं और कमांडरों के खिलाफ काफी रोष है। एडीजी अभियान,श्री खोपडे ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली कमांडरों को सरकार द्वारा तय योजना से लाभान्वित कराया जाएगा ‌ अधिकारियों ने बताया कि तीनों अति सक्रिय नक्सली सदस्यों सदस्यों ने नक्सली संगठन को छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने के लिए सीआरपीएफ के उपमहानिरीक्षक संजय कुमार से संपर्क कर आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताई थी। उन्हें सीआरपीएफ व पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने शीर्ष नेता संदीप यादव चंगुल से छुड़ाकर सकुशल आत्मसमर्पण कराया गया। उन्होंने घोषणा किया कि सरकार की आत्मसमर्पण के नीति के तहत मिलने वाले सभी लाभ उन्हें शीघ्र दिए जाएंगे। वही सीआरपीएफ के कमांडेंट डॉ निशित कुमार ने बताया कि सुबह का भूला शाम को वापस आ जाए तो भुला नहीं कहलाता सवेरे का प्रकाश हर एक प्राणी के लिए जागरण का अवसर देता है और चेतना से चेतना की ओर चलने का नाम सवेरा है इसी उक्ति को चरितार्थ करते हुए पुलिस अपर महानिदेशक सुशील मानसिंह खोपड़े, पुलिस महानिदेशक सीआरपीएफ जीबीएच गिरी ने आत्मसमर्पण किए नक्सलियों का स्वागत फूलों का हार पहनाकर किया।

लोगो की प्रतिक्रिया

No any comment posted yet..

अपनी प्रतिक्रिया दे