सजीव और निर्जीव दोनों एक-दूसरे पर निर्भर है: कपिलदेव

टेक ज्ञान

श्रवण आकाश, खगड़िया

खगड़िया : स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, कोशी कालेज, खगडिया की ओर से आयोजित चतुर्थ दिवसीय विभागीय सेमिनार विषय -“पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता ” का अध्यक्षीय संबोधन प्रभारी प्राचार्य डा. राजकुमार सिंह ने लोकडाउ के दौरान पर्यावरण में आए सुधार की चर्चा की। उन्होने कहा कि आज जलस्तर बढा है, ओजोन परत में सुधार आया है। डा. कपिलदेव महतो ने कहा कि तकनीकी युग में मानव द्वारा आर्थिक उद्देश्य और जीवन में विलासिता के विभूषित प्रकृति के साथ व्यापक छेड-छाड के परिणामस्वरूप प्राकृतिक पर्यावरण का संतुलन नष्ट हुआ है।

जिससे भूमि, जल, वायु, पेड-पौधे, जीव-जन्तुओं पर बुरा प्रभाव पडा है और पर्यावरण प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन जैसे संकट उत्पन्न हुआ है। वनस्पति विभाग के डा.आनन्द मिश्र ने कहा कि जीवित और अजीवित -दोनों एक दूसरे पर निर्भर करता है। जीव मरते हैं, सडते है तक ए-बायोटेक बनते है जो हवा, मिट्टी और पानी को प्रभावित करता है। जन्तु विज्ञान के विभागाध्यक्ष डा मो. हुमायूँ अख्तर ने कहा कि पर्यावरण उन सभी भौतिक, रसायनिक एवं जैविक कारकों की समष्टिगत इकाई है जो किसी जीवधारी अथवा पारितंत्रीय आजादी को प्रभावित करते हैं।

उन्होने यह भी कहा कि नदी, पहाड़, जंगल, हवा समुद्र, मैदान जैसे नैसर्गिक या प्राकृतिक पर्यावरण या गाँव, शहर, सभा, भीड, आवास जैसे मानवनिर्मित पर्यावरण को कारखानों से उत्पन्न धुआँ, विशेली हवा, कैमिकल से भारा जल पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है। जिससे सूक्ष्म जीवाणु, कीडे-मकोडे, जीव-जन्तुओं, पशु-पंक्षी जैसे जैविक घटकों को भारी नुकसान हो रहा है। गणित विभागाध्यक्ष डा जय नन्दन सिंह, डा. नरेश प्र यादव, प्रो ललितेश्वर, डा. रमेश डा संजय मांझी, प्रो एसान गुप्ता, प्रो कुंडल कुमार, हेमन्त कुमार, मिथलेश, धर्मराज, राहुल, सम्यक शांति, स्नेहा सुमन, ज्योति, दीप शिखा, मिस मधु, अनुष्का, मोदी. वकील ,रितेश, सोनु, पिंकी, प्रीतम, शिवानी, रुपमा और रोमांस ने पर्यावरण संरक्षण हेतु सरकार के कानून और विविध धाराओं का उल्लेख किया तथा पर्यावरण संतुलन हेतु वृक्ष लगाने तथा वृक्ष बचाने का संकल्प लिया।

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