कोरोना के प्रकोप को देखते हुए पत्रकार यूनियन ने किया 27 अप्रैल का धरना प्रदर्शन स्थगित

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खगड़िया एसडीओ के लिखित जवाब के मद्देनजर तत्काल प्रभाव से धरना प्रदर्शन को स्थगित किया जाता है,लेकिन कोरोना के प्रकोप कम होते हीं पुनः जोरदार तरीके से धरना प्रदर्शन की तीथी तय किया जाएगा

 

सुमलेश यादव

खगड़िया: नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सदस्य सुमलेश कुमार ने खगड़िया डीएम,एसपी, एवं चित्रगुप्त नगर थाना में आवेदन देकर 27/04/2021 को खगड़िया समाहरणालय के समक्ष धरना स्थल पर धरना प्रदर्शन करने की अनुमती की मांग किए थे लेकिन कार्यालय अनुमंडल पदाधिकारी खगड़िया के ज्ञापन 396 दिनांक 19/04/2021 के द्वारा धरना प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दिया गया। हालांकि पीड़ित पत्रकार सुमलेश कुमार के द्वारा दिये गये आवेदन के आलोक में कोसी प्रमंडलीय अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने खगड़िया के जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को ईमेल के माध्यम से पत्र भेज कर निवेदन किए थे कि पीड़ित पत्रकार सुमलेश कुमार के साथ उचित न्याय किया जाए। साथ हीं उन्होंनें पत्र के माध्यम से यह भी सुचित किए थे कि 27 अप्रैल को खगड़िया समाहरणालय के समक्ष पत्रकार सुमलेश कुमार द्वारा दिए जा रहे एक दिवसीय धरना प्रदर्शन में कोसी प्रमंडल क्षेत्र के पत्रकार भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सामिल होंगें। उन्होंने कहा कि पत्रकार के साथ स्थानीय पुलिस द्वारा किए गए कार्रवाई काफी निंदनीय है। जिसे नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। वहीं नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता,प्रदेश संयुक्त सचिव बिवेक कुमार यादव,वरीय प्रदेश उपाध्यक्ष सी के झा,प्रदेश अध्यक्ष अबोध ठाकुर,ने बताया कि तत्काल विभागीय पदाधिकारी के बातों को मानते हुए धरना प्रदर्शन को स्थगित किया जाता है। लेकिन जैसे ही कोरोना का प्रभाव कम होगा हमलोग सुमलेश कुमार यादव के नेतृत्व में जोड़दार ढ़ंग से भ्रष्ट प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगें। जानकारी के मुताबिक खगड़िया जिले के बेलदौड़ थाना में दर्ज कांड संख्या 352/2020 में एस आई महानन्द चौधरी एवं थाना अध्यक्ष शिव कुमार यादव पर साजीशन फंसाने का आरोप लगाते हुए दैनिक हिन्दी समाचार पत्र मीडिया दर्शन खगड़िया जिले के ब्यूरो चीफ सुमलेश कुमार ने डीएम,एसपी,डीजीपी, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री,सहित कई वरीय पदाधिकारी को पत्र लिखा है। लेकिन अभी तक प्रशासन द्वारा उचित न्याय नहीं मिल पाया है। जिसके कारण विवश होकर पीड़ित पत्रकार को न्याय के लिए आन्दोलन का रुख अख्तियार करने पर मजबूर होना पड़ रहा है ।

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