आज से नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा प्रारंभ

जीवन मंत्र

 खगड़िया : सूर्य उपासना और लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत बुधवार को नहाय-खाय के साथ होगी। गुरुवार को खरना है। जिले में पर्व की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंगलवार काे श्रद्धालुओं ने नहाय-खाय की तैयारी के लिए बाजार पहुंच कर लौकी, चने की दाल, अरवा चावल आदि की खरीदारी की। काेराेनाकाल के बीच लोगों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। छठ महापर्व में आस्था के साथ स्वच्छता और शुद्धता का अधिक ख्याल रखा जाता है। व्रती स्नान-ध्यान के बाद चार दिवसीय व्रत का संकल्प लेंगे। इसके बाद चावल, चने की दाल, लौकी की सब्जी तैयार कर उसका भोग लगाएंगे और प्रसाद ग्रहण करेंगे। गुरुवार को व्रती खरना करेंगे। दूध, गुड़ और चावल की खीर तैयार करेंगे। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद भोग लगाएंगे और जल ग्रहण करेंगे। इसके बाद 36 घंटे के निरजला व्रत की शुरुआत हो जाएगी। छठ बिहार का सबसे लोकप्रिय त्योहार है। यह दीवाली के चौथे दिन से शुरू होता है। इसलिए उसे छठ पर्व कहा जाता है। छठ पर्व के पहले दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी नहाय-खाय के रूप में मनाया जाता है। सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र किया जाता है। इसके बाद छठव्रती स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं।

चार दिवसीय छठ पूजा पर्व में कब क्या?

इस वर्ष यह त्योहार 18 नवंबर से 21 नवंबर तक मनाया जाएगा। 18 नवंबर को नहाय खाय, 19 नवंबर को खरना, 20 नवंबर को संध्या अर्घ्य और 21 नवंबर को उषा अर्घ्‍य के साथ इसका समापन होगा। इन 4 दिनों तक सभी लोगों को कड़े नियमों का पालन करना होता है। इन 4 दिनों में छठ पूजा से जुड़े कई प्रकार के व्‍यंजन, भोग और प्रसाद बनाए जाते हैं।

व्रत से संतान और धन की होती है प्राप्ति

पौराणिक कथाओं के अनुसार भारत के सूर्यवंशी राजाओं के मुख्य पर्व में एक था। कहा जाता है कि सम्राट जरासंध के पूर्वज को कुष्ठ रोग हो गया था। इस रोग से निजात पाने हेतु राज्य के ब्राह्मणों ने सूर्य देव की उपासना की थी। राजा के पूर्वज को रोग से छुटकारा मिल गया। इसके पश्चात छठ पर्व किया जाता है। श्रद्धा भाव से करने पर संतान और धन की प्राप्ति होती है।

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