ठंड के बीच श्रद्धालुओं ने लगाई मकर संक्रांति पर आस्था की डुबकी, दही चूड़ा का भी लिया आनंद

जीवन मंत्र

श्रवण आकाश, खगड़िया

खगड़िया : मकर संक्रांति को सूर्य के संक्रमण का त्योहार माना जाता है। एक जगह से दूसरी जगह जाने अथवा एक-दूसरे का मिलना ही संक्रांति होती है। सूर्यदेव जब धनु राशि से मकर पर पहुंचते हैं तो मकर संक्रांति मनाई जाती है। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। यह परिवर्तन एक बार आता है। सूर्य के धनु राशि से मकर राशि पर जाने का महत्व इसलिए अधिक है कि इस समय सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन हो जाता है। उत्तरायन देवताओं का दिन माना जाता है।

मकरसंक्रांति पर्व पर दही चूड़ा का आनंद लेते हुए

आज के दिन प्रातः काल से ही गंगा स्नान सह उबटन आदि लगाकर तीर्थ के जल से मिश्रित जल से स्नान करते दिखाई दिये। जिसको लेकर सभी गंगा नदी के तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। जिसके यहाँ तीर्थ का जल उपलब्ध न हो सकी तो उसके यहाँ दूध, दही से स्नान किया। जगह जगह गंगा नदी के तटों जैसे अगुवानी घाट, डुमरिया घाट, नयागांव, राका, आदि पर स्नान करने गये श्रृद्धालुओं का कहना हुआ कि तीर्थ स्थान या पवित्र पवित्र गंगा नदियों में स्नान करने का महत्व व आनंद ही कुछ और है। वही मौजूद श्रृद्धालुओं ने गंगा स्नान के उपरांत नित्य कर्म तथा अपने आराध्य देव की आराधना करते नजर आए। इस दिन हीं बच्चों युवाओं द्वारा पतंगें उड़ाए जाने का भी विशेष महत्व है। जिसको लेकर सभी बच्चों और युवाओं के चेहरे पर काफी प्रसन्नता नजर आई और बाजारों में पतंग की खुब खरीद – बिक्री हुई। ऐसा माना जाता है कि आज ही उत्तरायन देवताओं का अयन है। यह पुण्य पर्व है। इस पर्व से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। उत्तरायन में मृत्यु होने से मोक्ष प्राप्ति की संभावना रहती है। पुत्र की राशि में पिता का प्रवेश पुण्यवर्द्धक होने से साथ-साथ पापों का विनाशक है। सूर्य पूर्व दिशा से उदित होकर 6 महीने दक्षिण दिशा की ओर से तथा 6 महीने उत्तर दिशा की ओर से होकर पश्चिम दिशा में अस्त होता है। उत्तरायन का समय देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन का समय देवताओं की रात्रि होती है, वैदिक काल में उत्तरायन को देवयान तथा दक्षिणायन को पितृयान कहा गया है। मकर संक्रांति के बाद माघ मास में उत्तरायन में सभी शुभ कार्य किए जाते हैं।

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