तीन काला कृषि बिल के विरोध में भाकपा माकपा के समर्थकों ने शुम्भा पंचायत में किया सड़क जाम

राजनीति

प्रवीण कुमार प्रियांशु

खगड़िया: जिला अंतर्गत अलौली प्रखंड के शुम्भा पंचायत में भाकपा माकपा के समर्थकों द्वारा भारत बंद का समर्थन किया गया।शुम्भा-खगड़िया पथ को जाम किया गया और काला कृषि कानून बिल वापस लो का नारा लगाते रहे।इसके बाद शुम्भा-बखरी मार्ग में दुकान को बंद कराते हुए पूरे पंचायत का भ्रमण करते हुए शुम्भा सरस्वती स्थान चौक पर पहुँचकर घंटों जाम कर दिया।ट्रक,टैम्पू और ई- रिक्शा की लंबी कतार लग गई।मेडिकल की दुकानों को खुला रखा गया।बन्द समर्थकों का जुलूस शुम्भा चौक पर पहुँचकर सभा में तब्दील हो गई और सभा को संबोधित करते हुए भाकपा नेता सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि किसान द्वारा बुलाये गए भारत बंद का समर्थन भाकपा द्वारा किया गया है हमलोग भाकपा के सुप्रीमो और हमलोगों अपने वरिष्ठ नेता के आह्वान पर खगड़िया के शुम्भा पंचायत में भारत बंद का समर्थन किये हैं।किसान का जो तीन काला कानून बिल लाया गया है यह किसान विरोधी है।ये बिल अडानी और अम्बानी को लाभ पहुँचाने को लेकर लाया गया है इस बिल से किसानों का कोई भला नहीं होने वाला है।इस बिल के द्वारा भारत सरकार किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने का षडयंत्र है।अगर यह बिल किसानों के हक में रहती तो पिछले दस ग्यारह महीनों से किसान हजारों की संख्या में अपना घर छोड़कर सड़क में आंदोलन नहीं करते।हमलोग इस बिल के विरोध करते हुए इस बिल को वापस लेने की माँग करते हैं। वहीं नरेश पासवान ने कहा कि यह कृषि बिल किसान विरोधी तो है ही गरीब विरोधी भी है।इस बिल में किसान के हित में दिखाते हुए बड़े- बड़े पूंजीपतियों अडानी और अम्बानी जैसे-जैसे बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाना है। इस बिल में आलू,प्याज,दहलन, तेलहन को यह कहकर आवश्यक वस्तु अधिनियम से हटा रही है कि किसान अपने खेतों में उपजाए अनाज का भंडारण कर सकेंगे और ऊंची कीमत मिलने पर इसको बाजार में बेच सकेंगे लेकिन होगा ठीक इसका उल्टा किसान को रहने के लिए तो बढ़िया घर नहीं है।अनाज भंडारण के लिए गोदाम कहाँ से आयेगा।इस आवश्यक वस्तु अधिनियम से आलू,प्याज ,दहलन और तेलहन का फसल बड़ी-बड़ी कम्पनियों द्वारा किसानों से कम कीमत में खरीद कर गोदाम में जमाखोरी करेंगे और बाजार में इन सामानों का किल्लत दिखा कर ऊंचे दामों पर बेचेंगे।इससे तो किसान को कोई लाभ नहीं मिलेगा लेकिन गरीब लोगों को परेशानी होगा उनको भूखे प्यासे मरना पड़ेगा। कृषि बिल अभी पास होने की प्रक्रिया में है और अडानी जैसे कंपनियों का कई राज्य में बड़ा-बड़ा गोदाम बन कर तैयार है।अब बताइए इन आवश्यक चीजों को आवश्यक वस्तु अधिनियम से हटाने पर किसे लाभ होगा किसान को या बड़ी कंपनियों को।चौथा,एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट 1955 के हट जाने के बाद अब व्यापारी इन फसलों की जमाखोरी कर सकेंगे और जब चाहे महंगाई को नियंत्रित कर सकेंगे।एक तरीके से यह पूंजीपतियों के हाथ में अर्थव्यवस्था का नियंत्रित होना है।भारत में 80% से अधिक छोटे और मझोले किसान है,अर्थात इनके पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है।इससे उनका काफ़ी नुक़सान होगा।पांचवा,कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से बड़े-बड़े पूंजीपति जमीन खरीदेंगे और किसानों से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कराएंगे,इससे वे औने पौने दामों पर किसानों से जमीन लेंगे और अंग्रेजी के अक्षरों में समझौते कर आएंगे जो कि किसानों को समझ नहीं आता है। ऐसे उदाहरण पूरे भारतवर्ष में देखे गए हैं,जहां पर समझौते के नाम पर किसानों का शोषण किया गया है।इसके अलावा इन विधेयकों में जो भूमिहीन किसान हैं जो दलित समुदाय से आते हैं और लावणी करते हैं अर्थात किसान की जमीन की कटाई सिंचाई करते हैं तो उसका कुछ हिस्सा ले लेते हैं तो इससे दलितों की स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।वर्तमान भावी समिति प्रत्याशी हीरा देवी के पति राजेश पासवान ने कहा कि यह सबसे आवश्यक मुद्दा किसानों द्वारा उठाया गया है,जिसे केंन्द्र सरकार को ध्यान में लेना चाहिए और उसके लिए प्रबंध करना चाहिए।किसान कहते हैं की अगर कोई प्राइवेट कंपनी करार के बाद दिवालिया हो गयी या कंपनी को मनचाहा फसल न मिला तो क्या होगा? करारनामा भले ही किया गया हो लेकिन अगर कंपनी किसी कानून का उल्लंघन करती है तो एक सामान्य किसान उस बड़ी कंपनी के खिलाफ कैसे केस लड़ सकेगा?बन्दी में मुख्य रूप से
राजद नेता रासबिहारी कुमार उर्फ नटबर लाल,छात्र जिला सचिव दिलीप कुमार,छात्र उपाध्यक्ष अभिषेक कुमार,सरपंच प्रत्याशी उमेश पासवान,सीता देवी,विमल देवी,हीरा देवी,द्रौपदी देवी,संदीप कुमार,गवन कुमार,मुरलीधर ठाकुर,बब्लु ठाकुर,नितीश कुमार, रोहित कुमार,टीपु कुमार,अजीत कुमार,जितेंद्र कुमार,पंकज कुमार,अनिकेत कुमार,विक्की कुमार,सहित सैकड़ों कार्यकर्ता और ग्रामीण उपस्थित थे.

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