बहुकोणीय मुकाबले के पेच में फंसा बाराचट्टी

राजनीति

चौंकाने वाला परिणाम की आशंका हो रही बलवती

1990 में उमेश सिंह की जीत भी उड़ा दी थी कई दिग्गजों की नींद

रिपोर्ट: विनोद विरोधी

बाराचट्टी (गया )।बाराचट्टी (सु.) विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों चुनाव परवान पर है ।प्रथम चरण में यहां आगामी 28 अक्टूबर को मतदान होना है ।ऐसे में सत्ता और विपक्ष से जुड़े प्रत्याशी समेत अन्य राजनीतिक दलों की सरगर्मी उफान पर है ।इस बार यहां कुल 13 प्रत्याशी चुनावी समर में हैं और सभी अपने अपने जीत के दावे जता रहे हैं। वैसे तो यहां 2015 के विधानसभा के चुनाव में राजद- जदयू गठबंधन से पत्थर तोड़ने वाली महिला दिवंगत भागवती देवी की बेटी समता देवी ने जीत का परचम लहराई थी और विपक्ष में लोजपा- भाजपा गठबंधन के तहत पूर्व सांसद हरि मांझी की पुत्रवधू सुधा देवी दूसरे स्थान पर रही थी ।लेकिन सूबे के मुखिया नीतीश कुमार द्वारा राजद से नाता तोड़ लेने के बाद और भाजपा से गठबंधन कर लेने के बाद यहां का समीकरण उथल-पुथल हो गया है। इस बार जहां सत्ता से अलग हुई राजद विधायिका समता देवी को अपना आधार बचाने के लिए अथक मेहनत करनी पड़ रही है।मतदाता बीते 5 साल का हिसाब मांगने से बाज नहीं आ रहे। मतदाताओं का मानना है कि विधायिका समता देवी विपक्ष में रहने के बावजूद बाराचट्टी की समस्याओं को एक दिन भी सदन में उठाने का काम नहीं की। फलत: आम मतदाताओं का उस से मोहभंग होता नजर जा रहा है। हालांकि वह अभी ‘माई’ समीकरण के मत मिलने का दावा ठोंक रही है ।

लेकिन उनकी समस्याओं के सामने जीत पर प्रश्नचिन्ह खड़ा है ।वही इस बार एनडीए गठबंधन से हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेकुलर) के सुप्रीमो रहे जीतन राम मांझी की समधीन व पूर्व विधायिका ज्योति मांझी चुनाव मैदान में है। ज्योति मांझी 2010 में जदयू से बाराचट्टी विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुकी है ।वही हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी जी यहां से विधायक रहे हैं ।लेकिन इस बार दलबदल में माहिर होने के कारण आम मतदाता इन से खासे नाराज चल रहे हैं ।इनके आधार इलाको में इन दिनों वोट बहिष्कार का एलान किया हुआ है ।चूकि जीटी रोड सुलेबट्टा से सरवॉ बाजार होते हुए लाडू -बोधगया एवं बाराचट्टी से इटवॉ तक की सड़क की हालत काफी खस्ता होने के कारण वोट मांगने गए जीतन राम मांझी को काफी फजीहत उठानी पड़ी है। हम प्रत्याशी ज्योति मांझी अपने जातिगत आधार के बदौलत जीत के दावे कर रही है लेकिन उनका दावा कितना सफल होगा आने वाला समय बताएगा ? इधर लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी रेणुका देवी इस बार पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतरी है वे बाराचट्टी से जिला परिषद रह चुकी है और राज्य सरकार द्वारा विकास के दावे को खोखला साबित करने में जुटी है ।राजद विधायिका समता देवी व सत्ताधारी नीतीश कुमार के नाराज मतदाताओं को अपने पक्ष में गोलबंद करने में एडी चोटी एक कर रही है ।

लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान ने भी उन पर अपना हाथ रख दी है ।इस त्रिकोण मुकाबले के बीच बिहार लेनिन अमर शहीद जगदेव प्रसाद द्वारा स्थापित राजनीतिक पार्टी शोषित समाज दल के उम्मीदवार रामभजन मानव भी अपनी जोर आजमाइश के साथ चुनावी अखाड़े में कूदे हैं ।वे 1995 भी यहां से प्रत्याशी रहे थे ,लेकिन तब एक कच्चे खिलाड़ी के रूप में यहां पहुंचे थे ।लेकिन इस बार वे दलित व कुशवाहा बिरादरी के बीच अंदर ही अंदर अनेक जातीय समीकरणों को बेध डाला है मुशहरों और कुशवाहा समाज के अलावा अन्य कमजोर वर्गों के बीच पैठ बना ली है और जातीय मतों को ध्वस्त करने में जुटे हैं। तेज तर्रार और वाकपटुता में माहिर राम भजन मानव विधानसभा की लड़ाई को अपने पक्ष में करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं ।इसके अलावे जन अधिकार पार्टी प्रत्याशी बाल कुवर मांझी भी दलित और यादव मतों को प्रभावित करने में जुटे हैं ।

अगर यादव मतों का ध्रुवीकरण नहीं हुआ तो इनके एक बड़े भाग का मत अपने पक्ष में करने में कामयाब हो सकते हैं ।जाप सुप्रीमो पप्पू यादव यादवों के मतों पर अपनी नजर गड़ाए हुए हैं ।ऐसे में इस बहुकोणीय मुकाबले में इस बार सत्ताधारी प्रत्याशियों को खेल कहीं बिगड़ न जाए इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा। क्योंकि 1990 में यहां बहुकोणी मुकाबले में ही आईपीएफ के उमेश पासवान ने कई दिग्गजों को हराकर सीट पर कब्जा की थी और सत्तासीन दिग्गजो की नींद हराम कर दी थी ।कमोबेश यही स्थिति इस बार बनी है ।अब देखना है कि बाराचट्टी इस बार पुराना इतिहास दूहराती है अथवा नया इतिहास बनाती है।

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