अभाविप कार्यकर्ताओं ने नम आँखों से लाला लाजपत राय को दिया श्रद्धांजलि

टेक ज्ञान

श्रवण आकाश, खगड़िया

खगड़िया जिले के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय के जयंती के शुभ अवसर पर स्थानीय कार्यालय पर जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभाग संयोजक कुमार सानू कर रहे थे। वहीं कार्यक्रम के दौड़ान कार्यकर्ताओं ने लाला लाजपतराय जी के तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर दीप जलाए सह कार्यक्रम का विधिवत् उद्घाटन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व प्रदेश मंत्री भरत सिंह जोशी, नगर मंत्री सन्नी शर्मा, आईडियल कोचिंग सेंटर के निर्देशक चंदन कुमार, जिला सोशल मीडिया प्रभारी अभीजीत कुमार तथा नगर सह मंत्री अंकित कुमार द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर तथा लाला लाजपत राय जी के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। तत्पश्चात विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सभी ने लाजपत राय के जीवन परिचय से सीख लेने की कसमें खाई। जिसके बाद कुमार शानु ने “चंदन है इस देश की माटी” गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान परिषर लाला लाजपतराय के जयकारे से गूंज रहा था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तथा देश के वीर शहीद लाला लाजपत राय के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए भरत सिंह जोशी ने कहा कि लाला लाजपत राय ने एक राजनेता, लेखक और वकील के तौर पर देश को अपना अमूल्य योगदान दिया। आर्य समाज से प्रभावित लाला लाजपत राय ने पूरे देश में इसका प्रचार प्रसार किया। हमें आने वाले पीढ़ी को लाला लाजपत राय जैसे राष्ट्रभक्ति प्रदान करने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। साथ ही साथ लाला लाजपत राय ने महात्मा गांधी की जी के साथ मिलकर कई आंदोलनों को सफल बनाया था। स्वतंत्रता आंदोलनों में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा भी लिया तथा अपने अंतिम सांस तक भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत रहे। वहीं चंदन कुमार ने छात्रों को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता आंदोलनों में क्रांतिकारी भूमिका निभाने वाले लाला लाजपत राय जी के जीवन परिचय से अवगत करवाते हुए छात्रों को देश के महापुरुषों, शहीदों तथा देश के सेनाओं के सदा सम्मान करने की बात कही। वहीं विभाग संयोजक कुमार सानू ने बताया कि लाला लाजपत राय जहां एक बड़े स्वतंत्रता सेनानी थे, वहीं उन्होंने देश में पहला स्वदेशी बैंक खोलकर लोगों के बीच नया आत्मविश्वास भी पैदा किया था। जिसके बदौलत लाला लाजपत राय जी को पंजाब केसरी नाम से भी जाना जाता था। स्वामी दयानंद सरस्वती जी के साथ जुड़कर उन्होंने पंजाब में आर्य समाज को स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। एक शिक्षाविद के तौर पर उन्होंने दयानंद एंग्लो वैदिक विद्यालयों का भी प्रसार किया। आज देश भर में डीएवी के नाम से जिन स्कूलों को हम देखते हैं, उनके अस्तित्व में आने का बहुत बड़ा कारण लाला लाजपत राय ही थे। हम युवाओं को इनके जीवन परिचय से राष्ट्रभक्ति, समाज भक्ति की भावना को आत्मसात करना चाहिए।

वही मौजूद नगर मंत्री सनी शर्मा तथा नगर सह मंत्री अंकित कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि, लालाजी देश के उन अग्रणी नेताओं में से थे जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ बेखौफ होकर सामने आए और देशवासियों के बीच राष्ट्रवाद की भावना का प्रसार किया। उस दौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस किसी भी मसले पर सरकार के साथ सीधे टकराव से बचती थी। लाला लाजपत राय ने महाराष्ट्र के लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और बंगाल के बिपिन चंद्र पाल के साथ मिलकर कांग्रेस के भीतर ‘गरम दल’ की मौजूदगी दर्ज कराई। वही जिला सोशल मीडिया प्रभारी अभिजीत निगम तथा ज्योतिष कुमार ने अपने संबोधन में संयुक्त रूप से कहा कि ब्रिटिश राज के विरोध की वजह से लाला लाजपत राय को बर्मा की जेल में भी भेजा गया। जेल से आकर वो अमेरिका गए, वहां से वापस आकर भारत में गांधी जी के पहले बड़े अभियान यानी असहयोग आंदोलन का हिस्सा भी बने। ब्रिटिश राज के खिलाफ लालाजी की आवाज को पंजाब में पत्थर की लकीर माना जाता था। पंजाब में उनके प्रभाव को देखते हुए लोग उन्हें पंजाब केसरी यानी पंजाब का शेर कहते थे।
वही मौके पर इस कार्यक्रम में अभिजीत कुमार, रूद्र प्रताप, विकास कुमार, नीतीश कुमार, राजू कुमार, प्रीतम कुमा, नंदन कुमार, राजीव कुमार, राहुल रोशन, संतोष कुमार इत्यादि दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे।

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